Gullak 5 Review: मिश्रा परिवार की नई 'गुल्लक': क्या इस बार भी वही जादू चला
"तुम मम्मी थोड़ी हो, जो बिना पेमेंट मजदूरी करोगे!"

बॉस, बस यही वो बातें और डायलॉग्स हैं, जो हमें सालों से 'गुल्लक' और मिश्रा परिवार से फेविकोल की तरह जोड़े हुए हैं। अब ये सिर्फ एक वेब सीरीज नहीं रही, बल्कि हमारी अपनी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुकी है। इसलिए अब बात ये नहीं होती कि शो अच्छा है या बुरा, बल्कि बात ये होती है कि इस बार संतोष मिश्रा के घर में क्या नया सियापा हुआ? कहानी कितनी आगे बढ़ी? और ये सीजन कितना मजेदार है?
और भाई, इस बार तो मामला और भी बड़ा है क्योंकि हमारे अन्नू भैया बदल चुके हैं! तो जनता के बीच खलबली होना तो लाज़मी था कि नए वाले भैया कैसे हैं। चलिए, पूरे मामले को आसान भाषा में एक्सप्लेन करते हैं।
कहानी में क्या है नया? (The Plot)
मिश्रा जी के घर में वाई-फाई लग चुका है और बच्चे अब बड़े हो गए हैं। छोटे भाई अमन मिश्रा अपनी ही कोई अलग खिचड़ी पका रहे हैं, जिसके बारे में घर वालों को कानों-कान खबर नहीं है। बड़े भैया अन्नू मिश्रा का भी कुछ ऐसा ही हाल है। उधर, हमारे संतोष मिश्रा जी को घर की पुताई भी करवानी है और साथ ही एक नए घर का जुगाड़ भी देखना है।
सोने पर सुहागा ये कि बिट्टू की मम्मी अब फुल-टाइम ब्लॉगर बन चुकी हैं! हाथ में मोबाइल लेकर वो हर जगह 'vlogging' करने पहुंच जाती हैं। अब इस नए सेटअप के साथ मिश्रा परिवार की लाइफ में क्या-क्या तमाशे होते हैं, ये जानने के लिए तो आपको सीरीज देखनी पड़ेगी।
कैसी है ये सीरीज? (The Breakdown)
देखिए, 'गुल्लक' को लेकर हर किसी का एक ही ओपिनियन रहता है - "ये सीरीज अपनी है!" ये हमारे जैसे मिडल-क्लास परिवारों की, उनके सपनों, स्ट्रगल और रिश्तों की एकदम सच्ची कहानी है।
नए अन्नू भैया का ट्विस्ट: इस सीजन का सबसे बड़ा रिस्क था वैभव राज गुप्ता की जगह अनंत जोशी को अन्नू भैया के रोल में लाना। अब सोचिए, कोई अचानक आपसे कहे कि आपकी मम्मी बदली जा रही हैं, तो कैसा झटका लगेगा? दर्शकों का भी यही हाल था। लेकिन अनंत जोशी ने जिस कमाल के अंदाज में इस किरदार को पकड़ा है, वो आपको पुराने अन्नू भैया की कमी महसूस नहीं होने देते। शुरुआत के एक-दो एपिसोड में उन्हें नए रूप में एक्सेप्ट करने में थोड़ा टाइम लग सकता है, पर फिर वो आपको अपना बना लेते हैं।
मिडल-क्लास का तड़का: व्लॉगर बनी बिट्टू की मम्मी नकली पनीर के घपले से लेकर बॉलीवुड में हीरोइन की 8 घंटे की शिफ्ट और 'इक्वल पे' (बराबर सैलरी) जैसे बड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखती हैं। शो हंसते-हंसते काफी कुछ सिखा जाता है।
थोड़ी सी कमी: अगर सच कहें, तो इस बार पहले वाले सीजन्स जैसी गरमाहट और इमोशन थोड़ा कम महसूस होता है। आधे-आधे घंटे के 7 एपिसोड्स कहीं खिंचते तो नहीं हैं, लेकिन वो 'पहले वाली बात' भी मिसिंग लगती है। यहाँ मुकाबला 'अच्छे' और 'शानदार' के बीच है, तो बॉस, ये सीजन शानदार भले न हो, लेकिन अच्छा जरूर है।
एक्टिंग (Performances)
एक्टिंग के मामले में मिश्रा परिवार का हर एक मेंबर हमेशा की तरह हीरा है:
जमील खान (संतोष मिश्रा) और गीतांजलि कुलकर्णी (शांति मिश्रा) ने हमेशा की तरह लाजवाब काम किया है।
हर्ष मयर (अमन) और सुनीता राजवर (बिट्टू की मम्मी) अपने-अपने किरदारों में गजब ढा रहे हैं।
हैली शाह की एंट्री भी शानदार रही है।
अनंत जोशी ने रिप्लेसमेंट के भारी दबाव के बावजूद अन्नू भैया के रोल को जिया है और वो इस रोल में पूरी तरह फिट बैठते हैं।
राइटिंग और डायरेक्शन (Behind the Scenes)
सीरीज को श्रेयांश पांडे ने क्रिएट किया है और विदित त्रिपाठी ने लिखा है। राइटिंग अच्छी है, लेकिन इसे और भी कड़क बनाया जा सकता था। शो में जब "बॉस के चरणों में सूरज से ज्यादा विटामिन-डी होता है" जैसे देसी और तीखे डायलॉग्स आते हैं, तो पब्लिक तुरंत कनेक्ट कर जाती है। अगर ऐसे कुछ और डायलॉग्स होते, तो मजा दोगुना हो जाता।
अभय राउत और श्रेयांश पांडे का डायरेक्शन बढ़िया है। चूंकि शो का फॉर्मेट और इसके एक्टर्स पहले से ही सेट हैं, इसलिए डायरेक्शन के लेवल पर कोई चूक नहीं दिखती।
फाइनल वर्डिक्ट (The Verdict)
कुल मिलाकर, मिश्रा परिवार से हमारा रिश्ता ऐसा है कि इस सीरीज को छोड़ने का तो कोई च्वाइस ही नहीं है। कमी-बेशी अपनी जगह है, लेकिन 'गुल्लक' देखना तो बनता है।
BollyXplain रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3 स्टार्स - क्योंकि मिश्रा परिवार से मिलना हमेशा अच्छा लगता है!)
No comments